इसके अलावा अमेरिकी कंपनियों गूगल, एपल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन और डेलॉएट समेत कई कारोबारी संगठनों के जरिये आर्थिक और तकनीकी मदद भारत को मिल रही है। ब्रिटेन से 100 वेंटिलेटर्स और 95 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स 27 अप्रैल को पहुंच भी गए। वहीं, फ्रांस पहले फेज में देश में आठ बड़े ऑक्सीजन प्लांट तुरंत लगाएगा और अगले हफ्ते तक वहां से 5 लिक्विड ऑक्सीजन कंटेनर पहुंचने लगेंगे। जर्मनी कोरोना महामारी से जांच की तकनीक पर वेबिनार कर जानकारी साझा करेगा। ऑस्ट्रेलिया से भी बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स, सर्जिकल मास्क, दस्ताने और गॉगल्स आएंगे।
यूरोपीय देशों की ओर से फौरी मदद
आयरलैंड :- 700 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, एक ऑक्सीजन जनरेटर, 365 वेंटिलेटर
बेल्जियम : – 9000 डोज रेमडेसिविर
रोमानिया : – 80 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 75 ऑक्सीजन सिलेंडर
लग्जमबर्ग : – 58 वेंटिलेटर
पुर्तगाल : – 50503 शीशी रेमडिसिविर, 20 हजार लीटर ऑक्सीजन प्रति सप्ताह
स्वीडन : – 120 वेंटिलेटर
जर्मनी :- मोबाइल ऑक्सीजन प्लांट, 120 वेंटिलेटर, 8 करोड़ केएन 95 मास्क भेजेगा
ब्रिटेन :- 495 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, 140 वेंटिलेटर
कनाडा देगा 60 करोड़ की मदद
कनाडा की अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री करीना गुल्ड ने एलान किया कि कोरोना की लड़ाई के बीच कनाडा भारत को दस मिलियन कनाडियन डॉलर (60 करोड़ रुपये) की मदद करेगा। ये फंड कनाडा रेड क्रॉस को मुहैया कराया जा रहा है, जो इसे इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी को हस्तांतरित करेगा।
न्यूजीलैंड देगा 7 लाख 20 हजार डॉलर
न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री ने बुधवार को बताया कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों से जूझ रहे भारत की मदद के लिए उनका देश रेड क्रॉस को करीब 7लाख 20 हजाार 365 अमेरिकी डॉलर की राशि देगा।
चिकित्सकीय सामग्री भेजेगा दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह भारत की मदद के लिए ऑक्सीजन कॉन्सनट्रेटर, कोविड-19 के उपचार में इस्तेमाल होने वाली किट और अन्य चिकित्सकीय सामग्री की आपूर्ति करेगा।