
हथियार कारखानों में हड़ताल करने वालों को होगी जेल, मोदी सरकार का नया कानून
मोदी सरकार ने आयुध कारखानों के निगमीकरण को लेकर जो फैसला लिया था अब उस फैसले ने विवाद का रूप ले लिया है बता दें की इसे लेकर रक्षा उत्पादन से जुड़े मजदूरों और कर्मचारी संघो ने विरोध में हड़ताल शुरू कर दी जिसके बाद सरकार ने इसे रोकने के लिए

अध्यादेश जारी कर एक नया कानून बना दिया।
जिसमे रक्षा उत्पादन से जुड़े संस्थानों को आवश्यक रक्षा सेवा की श्रेणी में लाया गया है. आवयशक रक्षा सेवा के अंतर्गत आने वाले संस्थानों को परिभाषित किया गया है. जहाँ अगर ऐसे संस्थानों में कोई हड़ताल की कोशिश करता है तो वह गैर कानूनी माना जायगा।
जहाँ वयक्तियो की सजा का भी प्रावधान किया गया है अगर व्यक्ति नहीं मानता है तो उसे कणों के दाधार पर सजा सुनाई जायगी। और अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्यि को हड़ताल करने के लिए उकसाता है तो उसे दो साल की जेल और पन्द्रह हज़ार रूपये का जुर्माना भी भरना पद सकता है.
बता दें की 16 जून की बैठक में मोदी सरकार ने कारखानों को 7 निगमों में बांटने का फैसला किया है. जहां सरकार यह दावा कर रही है की इस फैसले के बाद इन कारखानों को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। ताकि विश्व स्टार पर आधुनिक हथियार तैयार हो सके. इसके विरोध में रक्षा उत्पादन क्षेत्र का कहना है की मोदी सरकार इस कदम के बहाने इन कारखानों का निजीकरण कर रही है.
जिसके बाअद 26 जुलाई को हड़ताल करने का ऐलान किया गया है. बता दें की इस कारखाने में करीब 80000 से ज्यादा मजदुर और कर्मचारी काम कर रहे हैं.

