
बीकानेर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में SOG ने तीन स्टॉकिस्ट को किया गिरफ्तार
बीकानेर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप SOG ने तीन स्टॉकिस्ट को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य को हिरासत में लेने के बाद एक बार छोड़ दिया। आला अधिकारियों ने कोरोना के चलते उम्रदराज आरोपियों से बीकानेर में ही पूछताछ करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले की जांच कर रही SOG की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिव्या मित्तल ने बताया कि मित्तल फार्मा और मित्तल ड्रग के विनय अग्रवाल, अनुज अग्रवाल व प्रदीप अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले पांच को हिरासत में लिया गया था। लेकिन जिंदल फार्मा और तंवर मेडिकोज के प्रतिनिधियों की उम्र 67 वर्ष और 70 वर्ष के आसपास होने के कारण एकबारगी उनकी गिरफ्तारी को टाल दिया गया। कोरोना महामारी के चलते इन दो की गिरफ्तारी बाद होगी। इस दौरान अस्पताल से निकले रेमडेसिविर इंजेक्शन की क्रास जांच भी इन दोनों से की जायेगी।
दबाव में हुई कार्रवाई
इससे पहले पांच आरोपियों को SOG ने हिरासत में जयपुर लेकर गाड़ी में बिठा लिया था लेकिन बाद में इनको वापस उतार लिया गया। बाद में तीन को ही गिरफ्तार किया गया। इस पर मीडिया ने सवाल उठाया कि दबाव में आकर दो को छोड़ा जा रहा है। इस पर SOG की ASP दिव्या मित्तल ने कहा कि मुझे दस दिन पहले फाइल मिल चुकी थी, लेकिन अब तक किसी तरह का कोई दबाव नहीं है।
क्या है आरोप
दरअसल, बीकानेर के पांच स्टॉकिस्ट पर आरोप है कि करीब पांच सौ दस इंजेक्शन की हेराफेरी की गई है। इन लोगों ने जिनके नाम से इंजेक्शन बताये हैं, उन्होंने इंजेक्शन खरीद से इनकार कर दिया। बीकानेर के अलावा राजस्थान से बाहर भी दो अस्पतालों को ये इंजेक्शन बेचे गए हैं। राज्य के कई जिलों में भी इंजेक्शन बेचने की पुष्टि हो रही है।


