बीकानेर के व्यापारी संकट में, करीब दस करोड़ रुपए का बाजार हुआ प्रभावित


  • राज्य सरकार ने इस बार दीपावली पर पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही बीकानेर के करीब दस करोड़ रुपए के व्यवसाय के रास्ते बंद कर दिए हैं। परेशान पटाखा निर्माता और विक्रेता सरकारी आदेश का चीरफाड़ करने में लगे हैं ताकि कहीं कोई रास्ता निकल जाये। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। व्यापारियों का कहना है कि अस्थायी अनुज्ञा पत्र देने से मनाही की गई है जबकि राज्यभर में एक हजार से अधिक स्थायी अनुज्ञा पत्र भी जारी हुए हैं। ऐसे लोगों के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं है। अकेले बीकानेर में करीब दस करोड़ रुपए का आतिशबाजी बाजार है, जिसका ९५ फीसदी व्यापार दीपावली के दौरान ही होता है।

  • खरीद कर कर ली, अब क्या करें
    पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार अब दीपावली से दस दिन पहले बता रही है कि उन्हें पटाखे बेचने नहीं है। हकीकत यह है कि विक्रेताओं ने देशभर से तरह तरह के पटाखों की खरीद तो पहले ही कर ली। एक अनुमान के मुताबिक अकेले बीकानेर में करीब आठ करोड़ रुपए के पटाखे खरीदे जा चुके हैं जबकि एक करोड़ रुपए के आसपास के पटाखे बीकानेर में ही बनते हैं।

  • बीकानेर में बनते हैं पटाखे
    बीकानेर में पटाखे बनाने वाली फैक्ट्रियां भी है। जहां बीकानेर की खपत का बहुत कम हिस्सा पूरा होता है लेकिन यहां भी करीब एक करोड़ रुपए का व्यापार होता है। बीकानेर में आधा दर्जन पटाखा फैक्ट्रियां है जो सालभर तक पटाखे बनाकर राजस्थान सहित देश के अनेक हिस्सों में भेजते हैं। इस बार पटाखों पर रोक लगते ही निर्मित पटाखें काम नहीं आ सकेंगे। इन पर लगी राशि भी फैक्ट्री संचालकों के लिए अब परेशानी का सबब बन गई है।

  • छह महीने से बिक्री शून्य
    दीपावली के अलावा विवाह समारोह में आतिशबाजी के चलते पटाखों की बिक्री होती है लेकिन कोरोना काल में विवाह समारोह भी औपचारिक तौर पर हो रहे हैं। जहां पटाखों की जरूरत ही नहीं पड़ रही। ऐसे में सालभर चलने वाली खरीद भी रुक गई है। अब दीपावली से उम्मीद थी लेकिन सरकार ने उस पर भी रोक लगा दी है।

  • प्रदेशभर के पटाखा निर्माता करेंगे साझा प्रयास
    बीकानेर फायरवक्र्स एसोसिएशन के सचिव वीरेंद्र किराडू ने बताया कि सरकार को आज से दो महीने पहले बताना चाहिए था कि पटाखों की बिक्री पर रोक रहेगी। जिस दुकानदार ने पटाखेें खरीद लिए है, वो अब क्या करेगा? किराडू ने बताया कि हमने जयपुर, जोधपुर, अजमेर सहित कई जिलों के व्यापारियों से बातचीत की है। राज्य स्तर पर एक कमेटी बनाने का प्रयास हो रहा है।