जोधपुर के पास मण्डोर में स्थित पन्नालाल गोशाला देश की पहली ऐसी गोशाला है जहां पर अपंग और बीमार गायों का निस्वार्थ भाव से इलाज किया जाता है। करीब 50 बीघा जमीन पर बनी यह गोशाला ढेड़ सौ साल पुरानी है। गोशाला में अंधी, लूली लंगड़ी व बीमार करीब 4000 गायों की प्रतिदिन देखभाल की जा रही है। यहां करीब 800 दृष्टिहीन गायें भी है इनमें से 120 गायों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जा चुका है और अब यह गायें देखने भी लगी है।
गोशाला में गायों की देखरेखपर प्रतिदिन ढाई लाख रूपए का खर्चा आता है और सालाना करीब आठ करोड़ का खर्च होेता है। यह देश की पहली गोशाला है जिसमें गायों के ऑपरेशन की व्यवस्था है। गोशाला में एक ऑपरेशन थियेटर बनाया गया है। जहां पर गायों की आंखों का ऑपरेशन किया जाता है। पिछले दो साल में यहां 120 गायों का ऑपरेशन किया गया साथ ही लूली लगड़ी गायों का भी उपचार किया जा रहा है।
गोशाला के ट्रस्टी सालगराम टाक के अनुसार गोशाला को भामाशाहों की ओर से मिलने वाली धनराशि से चलाया जाता है। इस गोशाला में एक भी गोवंश ऐसा नहीं है जो दूध देता हो और उसके दूध से घी, मक्खन बनाकर बाजार में बेच कर धन कमाया जा सकें। बताया जाता है कि पन्नालाल गोशाला में गायों के उपचार के लिए ऑपरेशन थियेटर बना हुआ है। जिसमें गायों का ऑपरेशन किया जाता है। करीब 50 बीघा में फेली इस गोशाला में गायों को रखने के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनें हुए है।
बताया जाता है कि गोशाला में एक आईसीयू की व्यवस्था भी की गई है। इसमें करीब 80 गाय है। जबकि लूली लंगड़ी गाय और बच्छड़ों के लिए अलग से व्यवस्था है। 80 वार्ड में से दो वार्ड खुले है जिनमें एक माह से छः साल तक के बच्छड़ों को रखा गया है। यहां करीब सौ लोग गायों की सेवा में लगे है। प्रतिदिन गायों पर ढाई लाख रूपए का खर्च आता है।