कोरोना वैक्सीन मात्र एक खुराक हैं पर्याप्त, संक्रमित हो चुके लोग है ज्यादा सुरक्षित


यदि आप कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं तो आपके लिये दो डोज वाले टीकों का बस एक ही डोज काफी है। कई अध्ययनों से यही साक्ष्य मिल रहे हैं। इससे वैक्सीन की कम उपलब्धता से उत्पन्न स्थितियों का सामना किया जा सकता है। संक्रमित लोगों को टीके का एक ही डोज इतनी एन्टीबाडी उत्पन्न कर रहा है जो दो डोज ले चुके मगर बिना संक्रमित लोगों की तुलना में काफी अधिक है। इसलिये फ्रांस, जर्मनी और इटली और कुछ अन्य देशों में भी संक्रमित हुये लोगों को बस एक डोज दिया जा रहा है। इससे कम समय में अधिक से अधिक लोगों को टीके लगाना संभव हो गया है। स्पेन के रोग प्रतिरोधक विज्ञान के विशेषज्ञ जियुलियाना मगरी का मानना है कि पूर्व संक्रमित लोगों के लिए दो डोज वाले टीकों का बस एक डोज ही काफी होना चाहिए । हलांकि यह एक जटिल मसला है। मगर अध्ययन तो यही संकेत कर रहे हैं। यद्यपि संक्रमित लोगों में रोग प्रतिरोधक एन्टीबाडी कुदरती तौर पर बन जाती हैं मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि ऐसे लोगों को भी वैक्सीन लगाई जाय। नेचर पत्रिका के 14 जून 2021 अंक में प्रकाशित शोधपत्र ऐसे साक्ष्यों का उल्लेख करता है कि संक्रमित लोगों के लिये एक डोज काफी है। ऐसे लोगों में विषाणु एन्टीजेन को निष्प्रभावी करने के लिए पर्याप्त एन्टीबाडी देखी गयी। इनमें खास एन्टीजेन की स्मृति रखने वाले बी सेल्स भी बढ़ी मात्रा में पाया गया। इन बी सेल्स में दस गुना की वृद्धि देखी गयी और एन्टीजेन को निष्प्रभावी करने की क्षमता पचास गुना बढ़ी पायी गयी। भारत और यूके का एक आरंभिक अध्ययन भी यही पुष्टि करता है कि एस्ट्राजेनेका (भारत में कोविशील्ड) का एक डोज ही पूर्व संक्रमित लोगों के लिए पर्याप्त है। यह देखा गया है कि ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों में जो पूर्व में संक्रमित हुये थे केवल एक एस्ट्राजेनेका का डोज उनमें बिना संक्रमित सहकर्मियों के टीकाकरण की तुलना में और भी अधिक इम्यूनिटी उत्पन्न करने वाला रहा। इसका लाभ अधिक से अधिक असंक्रमित जनसंख्या को टीकाकरण से आच्छादित करने में लिया जा सकता है। भारत सरकार को भी इस दिशा में अतिशीघ्र नीति बना लेना चाहिए क्योंकि एक विशाल जनसंख्या अभी भी टीकाकरण का बाट जोह रही है। ईबायोमेडिसिन नामक पत्रिका के मई अंक में भी इसी रणनीति की वकालत 19 वैज्ञानिकों द्वारा की गयी है। जिन देशों में बड़ी जनसंख्या का टीकाकरण बाकी हो और वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता न हो इस नीति का अनुसरण कर सकते हैं। हलांकि अमेरिका में जहां वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है वहां सभी संक्रमित या गैर संक्रमित को अनिवार्यतः दो डोज वाली वैक्सीन के दोनों डोज दिये जा रहे हैं। या एक डोज वाली वैक्सीन सभी को दी जा रही है। कुछ वैज्ञानिकों का यह सुझाव भी है कि संक्रमित हो चुके लोगों में वैक्सीन डोज से संतृप्तीकरण का निर्णय उनमें उत्पन्न और उपलब्ध एन्टीबाडी की मात्रा पर किया जाना चाहिए। किन्तु जहां वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति न हो वहां प्राथमिकता बिना संक्रमित हुये लोगों को मिलनी चाहिए।

लेखन आभार-डा. अरविन्द मिश्र

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