मां का दूध पीकर कोरोना को मात दे रहे हैं नौनिहाल, पढ़े खबर


 

जयपुर दुनिया भर में कोरोना वायरस को भले ही ‘नौनिहालों’ के लिए खतरनाक माना गया है, लेकिन मां का दूध, प्रोटोकॉल के तहत सही देखभाल और इलाज के जरिए नवजातों ने कोरोना को मात दी है। राजधानी के सांगानेरी गेट स्थित डेडिकेटेड कोविड सेंटर महिला चिकित्सालय में संक्रमित मां के प्रसव के बाद भर्ती 961 नवजात में से जांच में 22 (2 फीसदी) ही संक्रमित मिले।

चौंकाने वाली बात ये है कि 22 में से 21 नौनिहाल 7 दिन के भीतर ही संक्रमित हो गए। एक की गंभीर होने पर मौत हो गई। अब अस्पताल प्रशासन लोगों के मन से कोरोना का डर निकालने के लिए ठीक हो चुके नवजातों को कोरोना योद्धा के रूप में पेश कर रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार मांं का दूध अमृत के समान है, जिसमें एंटीबॉडी बनने के बाद किसी भी वायरस को खत्म की क्षमता होती है। महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट की अधीक्षक डॉ. आशा वर्मा के अनुसार, अमूमन कोरोना वायरस का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर नहीं पड़ता है क्योंकि मां से बच्चे में वर्टिकल ट्रांसमिशन नहीं होता है। वायरस के चलते जन्मजात विकृति के मामले भी नहीं मिल रहे। मां की बीमारी के कारण प्री-मेच्योर डिलीवरी करानी पड़ सकती है।

कोरोना को ऐसे हराया
पीपीई किट पहनकर प्रसव कराना। प्रसव के बाद नवजात को नियोनेटल आईसीयू में भर्ती कर मास्क, सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर मां का दूध पिलाते रहना। मां की रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही बच्चे को मां के साथ रखना।

सही इलाज व देखभाल
मासूमों के लक्षणों के आधार पर सही दवा, इलाज व देखभाल की गई। ऑक्सीजन सपोर्ट और वेंटीलेटर की जरूरत होने पर ही ऑक्सीजन व वेंटीलेटर लगाए गए। नवजात को मां तक ही सीमित रखा गया।

कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी

  • नवजात व बच्चों के अस्पतालों में नॉन कोविड मरीजों के लिए अलग से जगह चिन्हित करना।
  • नवजात और बच्चों के मुंह के हिसाब से आॅक्सीजन मास्क।
  • जेके लोन में 200 बेड की पीडियाट्रिक आईसीयू व 100 बेड की एनआईसीयू
  • जनाना अस्पताल चांदपोल में 50 बेड व महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट में 50 बेड की एनआईसीयू बनाना।
  • बच्चों के लिए अलग से डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाना। जांच, इलाज से लेकर आईसीयू की सुविधा।