विश्वफोटोग्राफी दिवस विशेष ; गोल्ड मेडलिस्ट फ़ोटो जर्नलिस्ट मनीष पारीक की जुबानी उनके अब तक के सफर की कहानी


  • बीकानेर/कमल स्वामी/19 अगस्त 
  • सन 2000 दैनिक भास्कर बीकानेर में जब मैं प्रेस फोटोग्राफर बना तब मेरी उम्र थी 18 साल। तब में उम्र के हिसाब से फोटोग्राफी में नौसिखिया था क्योंकि उस समय फिल्म रोल वाले मेनवल कैमरा से फोटोग्राफी बेहद जटिल थी। उस दौर में ना इंटरनेट था ना कोई सिखाने वाला मिला तब मेरा गुरु बना समय और मेरा जॉब। समय ने मुझे फोटोग्राफी के साथ जिंदगी जीना भी सिखाया।

मेरा जॉब प्रेस फोटोग्राफी जो बाकी
सभी कामों से
एकदम अलग है क्योंकि 
  • आंधी तूफान बारिश में जब लोग घरों में लौटते है तब हम बाहर निकलते है उसे कवर करने। जब कहीं लड़ाई दंगा आगजनी लाठीचार्ज होता है तब लोग दूर भागते है और हम उसके पास। कभी हम वीराने में भटकते है तो अभी सांस भी ना लेे सकने वाली भीड़ में दबकर काम करते है। कभी हम फोटो के लिए दिनभर भटकते है तो कभी वी आई पी की एक फोटो के लिए दिन भर भूखे प्यासे एक टांग पर खड़े रहते है। कभी हम कीचड़ में तो कभी हम रेड कारपेट पर भी होते है। काम करते समय हमारा कोई धर्म नहीं होता क्योंकि हम सर्वधर्म कवर करते है। हम ऐसे स्थानों पर भी जाते है जहा आम आदमी को जाने की मनाही है। हमारे काम का कोई समय तय नहीं कभी खाना छोड़ कर भी निकलना पड़ता है। 24 घंटे अलर्ट मोड़ पे है हमारी जिंदगी। छुट्टियां तो कम है ही त्यौहार भी हम घर पर नहीं टिक पाते। दुघर्टना हत्या रेप पोस्टमार्टम जिन हृदय विदारक दृश्यो को लोग देखना नहीं चाहते वे दृश्य कैमरा के साथ हमारे दिल में भी छप जाते है।

  • कभी हम लोगो की खुशी में मुस्कुरा लेते है तो कभी लोगो के दुखों में कैमरे के पीछे अपने आंसुओं को बहा लेते है।
    हम अच्छा चाहते है इसके लिए हमें तलाश बुराई की रहती है। रूटीन का काम तो आराम से होता है पर बहुत बार हमें जान खतरे में डाल कर भी काम करना पड़ता है। अनेक जगह मान सम्मान मिलता है तो कभी हमे फोटो ना छापने के लिए धमकियां। जिन लोगो को हमारे काम से न्याय मिलता है इनके लिए हम अच्छे है। जिनके गलत कामों को हम सब के सामने लाकर रोकना चाहते है वे हमारी बुराई करते है।

  • 20 सालो से बस यही सब करते करते मैं नौसिखिया फोटोग्राफर से लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं फोटोग्राफी सोसाइटी ऑफ अमेरिका से गोल्ड मेडलिस्ट बन गया। सम्मान इतने मिले की घर पे शोकेस छोटे पड़ गए और जनता के प्यार और विश्वास से झोली भर गई। इन सब के बीच मुझे खुद पर गर्व है कि मैने अपनी 20 साल प्रेस फोटोग्राफी बिना डरे हमेशा दूसरों की मदद करने के लक्ष्य के साथ ईमानदारी से की। कहने को तो और भी बहुत कुछ है पर अंत में यही कह कर अपनी बात समाप्त करूंगा।

A Picture is worth a Thousand Words

बस यही हमारा काम है कि

जिन हजारों शब्दों की खबर को सबूत की जरूरत होती है

वो जरूरत हम पूरी करते है सिर्फ एक क्लिक से।

I Am Proud to be A PRESS PHOTOGRAPHER
Happy World Photography Day