भारत को कृषि प्रधान देशकहा जाता है, और 60% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है । लेकिन इन्हीं कृषि उत्पादों को खरीद फरोख्त करने वाली अनाज मंडियों में केंद्र व राज्य सरकार के किसान विरोधी सरकारी नीतियों व नए कृषि अध्यादेश से उनके अस्तित्व पर तलवार लटक रही है और मंडिया बन्द होने के कगार पर है । इसके विरोध में राजस्थान खाद्य व्यापार संघ के बैनर तले बीकानेर सहित प्रदेश की सभी 247 अनाज मंडियों में एक दिवसीय हड़ताल के चलते सोमवार को कारोबार पूरी तरह से ठप्प रहा, जिसमे लगभग अनुमानित 600 करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित हुवा ।
श्री बीकानेर कच्ची आड़त व्यापार संघके संरक्षक मोतीलाल सेठिया व अध्यक्ष जगदीश पेड़ीवाल ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की किसान विरोधी गलत नीतियों के चलते अनाज व्यापारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है जिसमे कृषि विधेयक 2020 में मंडी क्षेत्र से बाहर कृषि उपज खरीद करने वालों को मंडी शुल्क व कृषक कल्याण फीस का इत्यादि किसी भी प्रकार का कर देय नहीं । केवल मात्र पेन कार्ड धारक ही कृषि उपज खरीद कर सकता है ।
इस परिस्थिति के कारणपिछले दो माह से मंडियों का व्यापार मंडी प्रांगणों के बाहर चला जा रहा है । यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया तो एक दिन अनाज मंडियां वीरान हो जायेगी और नाम मात्र का राजस्व रह जायेगा । केवल मात्र अनाज मंडी प्रांगण के बाहर के क्षेत्र को मंडी क्षेत्र घोषित करने से राजस्व नहीं मिलने वाला है मात्रा आधा प्रतिशत एक प्रतिशत के मार्जन पर बाहर व्यापार करने वाला व्यापारी भारी भरकम 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क व 1 प्रतिशत कृषक कल्याण फीस देने में सक्षम नहीं है ।
संघ के मंत्री नन्दकिशोर राठी ने सरकार पर कटाक्ष करते हुवे कहा कि टैक्स का दायरा जितना ज्यादा होगा काला बाजारी व भ्रष्टाचार उतना ही ज्यादा होगा । राठी ने कहा कि राजस्थान में दूर तक खेती का इलाका है जहां दूर – दूर तक खेती होती हमारे प्रदेश की कृषि उपज पर कर ज्यादा होने के कारण कृषि उपज किसानों के नाम पर समीपस्थ राज्यों में , उद्योगों में , उपभोक्ताओं के पास सीधी चली जायेगी और उसको रोकने का भी अब राज्य सरकार के पास कोई कानून नहीं है । मंडी प्रांगणों में व्यापारी , मुनीम , दलाल , मजदूर , पल्लेदार , गाड़े वाले , ट्रक वाले , इत्यादि लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है वे बेरोजगार हो जायेंगे ।
इस संदर्भ में सोमवारको अनाज मंडी के व्यापारिक प्रतिनिधि मंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर गौरी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कृषि अध्यादेश में राहत की माँग की हैं । ज्ञापन में बताया गया हमारी राज्य सरकार वास्तव में किसानों का भला करने की दृढ़इच्छाशक्ति रखती है तो पुरे प्रदेश में एक सम्मान यह नियम लागू कर दें कि किसानों की उपज खरीद करने वाले को किसी भी प्रकार का कर अथवा उपकर इत्यादि नहीं देना होगा चाहे वो कृषि उपज किसान से सीध खरीदें अथवा मंडी प्रांगणों में निलामी पद्धति से बोली व्यवस्था के तहत खरीदें । एक सम्मान नियम लागू करें ।
ज्ञापन में मांग व सुझाव है कि मंडी प्रांगों में तथा बाहर मंडी शुल्क व कृषक कल्याण फीस इतनी कम कर दी जावे कि पिछले पच्चीस – तीस वर्षों की मेहनत से बसी अनाज मंडियों का असतित्व कायम रह सके और मंडी प्रांगणों के बाहर भी काला बाजारी व भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं मिले तथा प्रदेश की कृषि उपज बाहरी राज्यों में भी नहीं जायें । इसलिये मंडी शुल्क व कृषक कल्याण फीस दोनों ही मिलाकर 0.50 पैसा प्रति सैंकड़ा तक रखा जावें । इससे राजस्व में विशेष कमी नहीं आयेगी , तथा मंडी प्रांगणों में कार्य करने वालों से युजर चार्ज या रख रखाव खर्च भी वसुल कर मंडियां संचालित रखी जा सकती है ।
प्रतिनिधि मंडल में मोतीलाल सेठिया, सत्यनारायण देवरा, रामलाल बेनीवाल, मनोहर लाल सिहाग, सीताराम सिहाग सहित आदि व्यापारी शामिल थे ।