
आज ही के दिन देश के शूरवीरों ने चीन को सबक सिखाया था #गलवान घाटी
गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद बीते एक साल में भारतीय सेना ने एलएसी पर खुद को कैसे मजबूत किया है. आज ही के दिन देश के शूरवीरों ने चीन से सबसे बड़ा बदला लिया था. आपको बताते हैं हमारे जांबाज सैनिकों ने चीन को कैसे झटका दिया.

नई दिल्ली: गलवान में भारतीय सैनिकों के शौर्य के 1 साल पूरे हो गए हैं. आज ही के दिन देश के शूरवीरों ने चीन से सबसे बड़ा बदला लिया था. आज देश उन 20 शहीदों को याद कर रहा है जिन्होंने गलवान में सर्वोच्च बलिदान दिया था.
आज सेना की ओर से लेह में उन सभी 20 शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई है. उसके बाद से ही भारत गलवान में मजबूत स्थिति में है और कायर चीन के पांव उखड़ गए हैं. 1 साल में भारतीय सेना ने लद्दाख में 50 हजार से ज्यादा सैनिकों की तैनाती की है. वहां सड़कें बना ली गई हैं ,,और पैंगोंग से चीन के तंबू हमेशा के लिए उखाड़ दिए गए हैं.
एलएसी पर नापाक हरकतें करने वाला चीन थर्रा रहा है. 15 जून 2020 को गलवान में घुसपैठ की कोशिश के बाद से ही भारत ने एलएसी में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी थी. इस बीते एक साल में भारतीय सेना और वायुसेना ने अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा लिया है. चीन की किसी भी नापाक हरकत से निपटने के लिए भारतीय जांबाज पूरी तरह से बॉर्डर पर मुस्तैद हैं.

15 जून, 2020 को चीनी सेना ने गलवान घाटी में हिंसक झड़प करके खुद का अधिक नुकसान कर लिया. जहां भारतीय सेना ने लद्दाख सेक्टर में अपनी उपस्थिति मजबूत कर ली है. वहीं राफेल लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करके भारतीय वायु सेना पहले से अधिक ताकतवर हो गई है.
राफेल फाइटर जेट दुनिया के सबसे ताकतवर फाइटर जेट्स में से एक है. फ्रांस से भारत को मिलने के बाद वायुसेना की ताकत पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई है.
भारतीय सेना ने लद्दाख के साथ-साथ पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी अपनी तैनाती मजबूत कर दी है, क्योंकि सेना ने अब चीन सीमा से निपटने के लिए एक अतिरिक्त स्ट्राइक कोर को तैनात किया है. 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को पूरे पूर्वोत्तर राज्यों का प्रभार दिया गया है. साथ ही एक अतिरिक्त डिवीजन भी दी गई है, जिसमें दस हजार से अधिक जवान शामिल हैं.
पूर्वी लद्दाख जैसी जगह जहां पर बहुत ठंड पड़ती है, वहां हमेशा से जवानों को रहने के लिए आवास की जरूरत पड़ती थी. इस बार ऐसे इलाकों में बनाए गए आवासों ने सेना की काफी मदद की और जवानों की शक्ति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ा दी.
यूं तो बॉर्डर पर पिछले कई सालों से इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का काम चल रहा था, लेकिन पिछले एक साल में इसमें और तेजी आई है. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने सड़कों को सुगम बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया.
सेना के इंजीनियरों ने पिछले 11 महीनों के भीतर ही उन सुविधाओं को बना लिया, जिसकी प्लानिंग अगले पांच सालों में बनाने की थी. कनेक्टिविटी बढ़ने से सेना को सभी फॉरवर्ड स्थानों को सालभर सप्लाई करने में मदद मिली और कुछ ही समय में सैनिकों को तैनात करने की क्षमता दी.
कुल मिलाकर गलवान में चीन की एक गलत हरकत ने एलएसी पर भारत को अपनी तैनाती मजबूत करने की वजह दे दी. एलएसी पर भारत की हर दिन बढ़ती ताकत से अब ड्रैगन के होश उड़े हुए हैं.