
हेप्पी बर्थ डे बीकानेर:आज ही के दिन जोधपुर से अलग होकर राव बीका ने रखी बीकानेर की नींव, 534 साल की यादें समेटे शहरवासी आज छत्तों पर
हर साल दस करोड़ की पतंगबाजी
एक अनुमान के मुताबिक बीकानेर में हर साल करीब दस करोड़ रुपए की पतंगबाजी हो जाती है। बीकानेर में बरेली सहित उत्तरप्रदेश के अनेक हिस्सों से पतंग आती है, मांझा भी वहीं से आता है। कई कारीगर बीकानेर में आकर ही मांझा बनाते हैं। पतंग बनाने का काम बीकानेर में भी होता है, लेकिन मांग अकेला बीकानेर पूरी नहीं कर पाता। ऐसे में बाहर से बड़ी मात्रा में पतंगे आती है।
इस बार दस फीसदी भी नहीं
इस बार बीकानेर में दस फीसदी भी पतंगबाजी नहीं हो रही है। कमोबेश ऐसा ही पिछली बार भी हुआ था। अलबत्ता पिछली बार तो जिला कलक्टर ने पतंगबाजी नहीं करने ओदश जारी कर दिए थे जो इस बार नहीं हुए। लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद है, ऐसे में पतंगों की बिक्री नहीं हो रही है। चोरी छिपे बीकानेर के कुछ हिस्सों में लोग घरों से ही पतंगें बेच रहे हैं। हालात यह है कि पतंग उपलब्ध ही नहीं हो रही। जो मिल रही है, उनकी कीमत हर साल से ज्यादा है।
आज खीचड़ा और इमलाळी
जिस तरह बर्थ डे पर हर कोई विशेष भोजन करता है ठीक वैसे ही बीकानेर में आज स्थपना दिवस पर विशेष भोजन बनता है। लगातार दो दिन शहर में घर पर खीचड़ा बनाया जाता है। इसके लिए पहले गेहूं को गीला किया जाता है। फिर धूप में सुखाया जाता है। फिर इसे कूटकर तैयार किया जाता है। इसी गेहूं को खीचड़ी की तरह बनाया जाता है। इसका दाना मोटा होता है, इसलिए इसे खीचड़ा कहते हैं। इसी के साथ इमली के पानी से इमलाळी बनाई जाती है। गर्मी में शीतल पेय की तरह इमली के खट्टे मिट्ठे पानी को बहुत पसन्द किया जाता है।
नई मटकी, नई शुरूआत
हर बीकानेरवासी आज के दिन अपने घर में नई मटकी रखती है। इस मटकी की बकायदा पूजा होती है। इतना ही नहीं घर में जितने सदस्य है, उतने ही सदस्यों की छोटी-छोटी मटकियां (लोटड़ी) भी मटकियों के साथ रखी जाती है। मिट्टी की बनी इन लोटड़ी में पानी का स्वाद ही अलग होता है।
आज भी पूर्व राजघराने से लगाव
बीकानेर आज भी अपने राजघराने से उतना ही लगाव रखता है। बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में लगातार तीसरी बार राजपरिवार की सदस्या सिद्धि कुमारी विधायक के रूप में चुनाव जीत रही है। पूर्व राज परिवार भी अक्षय द्वितीया और तृतीया के दिन शहर के आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। आज भी यहां का पुष्करणा समाज अपने सामूहिक विवाह सावे के लिए राज परिवार से अनुमति लेता है ओर राजपरिवार की सदस्य उसमें हिस्सा लेती है। होली के अवसर पर पूर्व राजपरिवार सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी निभाता है।