डाॅ. राजेश कुमार व्यास बने संयुक्त निदेशक


  • जयपुर, 9 नवम्बर।
  • राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर डाॅ. राजेश कुमार व्यास को संयुक्त निदेशक पद पद पदोन्नत किया है।
    बीकानेर मूल के डाॅ. व्यास ने सोमवार को ही संयुक्त निदेशक, राज्यपाल, राजस्थान के पद पर अपना कार्यभार संभाल लिया। केन्द्रीय साहित्य अकादेमी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित डाॅ. व्यास राजस्थान सूचना सेवा के वर्ष 1996 बैच के अधिकारी हैं।
  • इससे पहले वह उपनिदेशक (पीआर), राज्यपाल, राजस्थान के पद पर कार्य कर रहे थे। व्यास राजस्थानी और हिन्दी के जाने-माने कवि, संस्कृतिकर्मी, कला आलोचक और यात्रावृतान्तकार हैं। कला आलोचना की उनकी कृति ‘रंगनाद’, ललित कला अकादेमी द्वारा ‘कलावाक्’ और ‘सौन्दर्य के सत्यान्वेषी’, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादेमी से ‘भारतीय कला’ एवं ‘सांस्कृतिक राजस्थान’ तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी) द्वारा प्रकाशित उनके यात्रा संस्मरण ‘कश्मीर से कन्याकुमारी’ तथा ‘नर्मदे हर’, संगीत सर्जना की ‘सुर जो सजे’ आदि चर्चित पुस्तकें हैं।
  • उन्होंने बच्चों के लिए भी ‘बुद्धि से विजय’ और ‘ऐसे बरसते हैं बादल’ जैसी लोकप्रिय पुस्तकें लिखी हैं। केन्द्रीय ललित कला अकादेमी की पत्रिका ‘समकालीन कला’ के वह अतिथि सम्पादक रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान ललित कला अकादेमी की पत्रिका ‘आकृति’ के ‘लोक-आलोक’ और ‘कलाओं के अन्तःसम्बन्धों पर एकाग्र’ विषेष अंकों का भी उन्होंने संपादन किया है। दूरदर्शन ने डाॅ. व्यास के शोध एवं आलेख पर आधारित यात्रा वृतान्त धारावाहिक ‘डेजर्ट काॅलिंग’ बनाकर डीडी भारती, दूरदर्शन नेशनल चैनल से उसे प्रसारित किया है।
  • भारतीय संस्कृति से संबद्ध कोई एक दर्जन से अधिक वृत्तचित्रों का लेखन भी उन्होंने किया है। डाॅ. व्यास को राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी द्वारा पद्य का सर्वोच्च ‘उस्ताद गणेशीलाल व्यास पद्य पुरस्कार’, भारत सरकार का प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन अवार्ड’, पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए ‘माणक’ अलंकरण, राजस्थानी युवा संस्था, धु्रवपद धाम तथा विभिन्न अन्य संस्थानों द्वारा निरंतर सम्मानित किया जाता रहा है।