राजस्थान के शिक्षा मंत्रीगोविन्द सिंह डोटासरा द्वारा कुछ दिन पहले मीडिया को संबोधित करते हुए संपूर्ण शिक्षा जगत को धंधा कहने पर पूरा देश आक्रोशित है। नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस – निसा के प्रांतीय प्रभारी डॉ दिलीप मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि एक कानूनी नोटिस प्रेषित कर निसा द्वारा राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा पर निसा ने 10 करोड़ का मानहानि का दावा किया है।
डॉ मोदी ने बताया कि शिक्षा जैसेपावन कार्य को मीडिया के सामने धंधा कहना संपूर्ण शिक्षा जगत का अपमान है, इससे ना केवल स्कूल संचालकों एवं शिक्षकों की भावनाएं आहत हुई हैं बल्कि समाज में भी स्कूलों की छवि खराब हुई है। नोटिस में शिक्षा मंत्री को लिखा गया है कि निसा संगठन की संपूर्ण देश में शाखाएं है तथा राजस्थान के सैंकड़ों निजी स्कूल इस संगठन के सदस्य है इसलिए निसा संगठन इस मुद्दे को संपूर्ण शिक्षा जगत से संबन्धित मानते हुए आप पर मानहानि का दावा करता है।
नोटिस में आगे उल्लेख कियागया है कि शिक्षा को सदैव एक पावन एवं पुनीत कार्य माना गया है और शिक्षामंत्री द्वारा शिक्षा को इस प्रकार धंधा कहना नि:संदेह गैर सरकारी स्कूल संचालकों, अध्यापकों एवं बच्चों का अपमान है साथ ही मंत्री का यह कृत्य एवं व्यवहार न्याय एवं कानून सम्मत नहीं है जिसका उल्लेख माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने कुछ निर्णयों में किया गया है। डॉ मोदी ने कहा कि शिक्षा तकनीकी एवं कानूनी दृष्टि से चैरिटी अर्थात् नोट फॉर प्रोफिट (नॉन -कॉमर्शियल एक्टीविटी)की श्रेणी में आती है जिसे धंधा कहना सर्वथा गैर-कानूनी है।
निसा संगठन ने शिक्षामंत्री से मांग की है कि या तो वे 15 दिनों के अन्दर-अन्दर मीडिया के समक्ष सार्वजनिक रूप से संपूर्ण शिक्षा जगत से माफी मांगे अन्यथा रूपए 10 करोड़ के मानहानि के दावे में निसा संगठन द्वारा आगे की कार्यवाही की जाएगी।
निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री जी के बयान विवादास्पद होने के साथ पूर्ण रूप से अव्यवहारिक एवं तुगलकी बयान है। उन्होंनें कहा कि पूरे हिन्दुस्तान के स्कूल संचालक एवं शिक्षकगण राजस्थान के शिक्षकों के साथ हैं। शर्मा ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री माफी नहीं मांगते हैं तो यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन जाएगा। उल्लेखनीय है कि पैपा ने भी इस संंबंध में शिक्षामंत्री के इस बयान पर आपत्ति जताई थी और उनसे इस बयान के संबंध में माफी मांगने के लिए कहा था। पैैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने शिक्षामंत्री के इस बयान को उन सभी गुरूजन, मां समान बहन-बेटियों शिक्षिकाओं का भी घोर अपमान बताया था जो शिक्षा जैसा पवित्र कार्य करते हुए समाज के कर्णधारों का निमार्ण कर रही हैं।