बीकानेर में सीएमएचओ की कुर्सीका विवाद बड़ा बनता जा रहा है। दोनों तरफ से बयान आ चुके हैं। सीएमएचओ डॉ बीएल मीणा हाइकोर्ट से ट्रांसफर पर रोक का आदेश ले आए। हाइकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि मीणा 30 दिसंबर के ट्रांसफर आदेश पर 27 जनवरी 2020 की सुनवाई तक रिलीव नहीं होंगे। 27 जनवरी को दूसरे पक्षकार अपना जवाब पेश करेंगे, इसके बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
मीडिया में जैसे ही ट्रांसफर पर रोक की ख़बरें छपी को सीएमएचओ डॉ सुकुमार कश्यप ने मीडिया के सोशल मीडिया वाट्सअप ग्रुप में बयानबाजी कर दी। कहा कि गजेटेड ऑफिसर नये ऑफिसर की ज्वाइनिंग के साथ स्वत: रिलीव हो जाते हैं। मीडिया द्वारा वर्जन ना लेने पर भी नाराजगी जताई। हमने इस बारे में कश्यप से बात की तब भी यही कहा। कश्यप ने मीणा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने हाइकोर्ट को भ्रमित किया है। रिलीव होने का तथ्य छुपाने का आरोप भी लगाया।
वहीं नागौर में खुद द्वारा स्टे लाकर पद पर काबिज रहने की बात पर कहा कि उन्हें नागौर सीएमएचओ के पद से एपीओ करके हटाया गया था। जिस पर वह कोर्ट गए थे। इस दौरान किसी अन्य सीएमएचओ को पदस्थापित नहीं किया गया था बल्कि महीराम महिया को कार्यवाहक सीएमएचओ लगाया गया था।
वहीं दूसरी ओर मीणा ने बयान दिया है कि वे रिलीव हुए ही नहीं। 1 जनवरी से वें मेडिकल पर हैं। उन्होंने चार्ज सौंपा नहीं और ना ही उन्हें रिलीव होने का कोई लेटर मिला। ऐसे में नियमानुसार व हाइकोर्ट के आदेशानुसार वह अभी भी बीकानेर सीएमएचओ हैं। हालांकि वह 27 जनवरी को जवाब पेश होने का इंतज़ार करेंगे।
ऐसे में सीएमएचओ की कुर्सी को लेकर विवाद गहराते जा रहे हैं। सूत्रों से यह भी पता चला है कि कश्यप बीकानेर ही रहना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने पहले से ही पूरा जोर लगा रखा था। बताया जा रहा है कि कश्यप का निवास लंबे समय से बीकानेर की जयनारायण व्यास कॉलोनी में है। यहां उनका अपना मकान है तथा परिवार यहीं रहता है। इसी वजह से बीकानेर सीएमएचओ पद में उनकी विशेष दिलचस्पी है। ऐसे में अब मुकाबला बड़ा होता दिख रहा है। इन सबके बीच कश्यप को होम एरिया में सीएमएचओ लगाए जाने पर भी सवाल भी खड़े हो रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि कागजों में कश्यप बीकानेर के नहीं है।