जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि किसान आंदोलन के महत्व को कम करने के लिए भाजपा नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयान दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को आंदोलन के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय किसानों के दुखों दो दूर करना चाहिए। कृषि कानून कृषक समुदाय के हित में नहीं हैं, उन्हें वापस लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सबसे विडंबना है कि देश को खाना खिलाने वाले किसान भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर हैं। भारत सरकार उनकी समस्याओं को नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपने अहंकार को दूर रख सहानुभूतिपूर्वक किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। किसान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं। किसानों का विरोध उनकी वास्तविक चिंताओं के लिए है, जिसे सरकार नजरअंदाज कर रही है। हमारे किसानों ने राष्ट्र के सामने शांतिपूर्ण आंदोलन का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
गौरतलब है कि कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की सीमों पर लगातर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान संगठनों की ओर से पिछले दो सप्ताह से ज्यादा समय से आंदोलन किया जा रहा है। किसानों संगठनों की ओर से सोमवार को भूख हड़ताल की गई।