
बीकानेर:माता का दरबार बंद हुआ तो बाजारों की रौनक खत्म; देशनोक बाजार ग्राहक गायब, दुकानदार परेशान,जाने पूरी खबर
इन सबके विपरीत चौक में सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकानें है, खिलौने हैं, बस ग्राहक नहीं है। कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए करणी माता मंदिर को 13 से 21 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। ऐसे में नवरात्र में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या महज 20% रह गई। ये श्रद्धालु भी मंदिर के बाहर से ही हाथ जोड़कर निकल जाते हैं। ऐसे में खरीददारों का अभाव है। दुकानदार आमतौर पर ग्राहक को अपनी ओर खींचने के लिए पानी से हाथ धुलवाने के बहाने पानी से भरी गिलास लिए खड़ा रहता है, जैसे ही श्रद्धालु हाथ धोता है, उसे प्रसाद लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस बार दुकानदार गिलास लेकर ही खड़े है लेकिन ग्राहक नहीं है।
दो किलोमीटर में होता है मेला
नवरात्र के दौरान देशनोक में प्रवेश करना मुश्किल होता है। एक से डेढ़ किलोमीटर दूर यातायात पुलिस वाहनों को रोक देती है। इस बार ऐसा कुछ नहीं है। आप मंदिर के ठीक पास अपना वाहन ले जा सकते हैं। आमतौर पर जहां कदम रखने को जगह नहीं है, वहां पक्षियों का जमावड़ा है और आराम से गेहूं के दाने चुग रहे हैं। मंदिर के मुख्य कपाट बंद है। कुछ मंदिर कर्मचारी ही अंदर आते-जाते दिख रहे हैं।
प्रसाद मंदिर से बाहर
जो लोग आसपास की दुकानों से प्रसाद लेकर आ रहे हैं, वो सिक्याेरिटी पर ही एक शख्स ले लेता है। वो कुछ प्रसाद रखता है और शेष वापस दे देता है। कहा जा रहा है कि यह प्रसाद बाद में निज मंदिर तक पहुंच जाता है। हालांकि इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।
इन मंदिरों में भी ये ही हाल
बीकानेर में देशनोक के अलावा नागणेचीजी मंदिर में भी ऐसे ही हालात है। यहां मंदिर के बाहर एक LED लगा दिया गया है। जहां श्रद्धालु दर्शन करके वापस लौट रहे हैं। मंदिर के अंदर आम श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिल रहा है। ऐसे में यहां लगने वाला मेला भी खत्म हो गया। आमतौर पर यहां भी लंबे-चौड़े क्षेत्र में नवरात्र में शाम से देर रात तक मेला भरता है। मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन चलते हैं। श्रद्धालु बड़े भाव से यहां देर रात तक भजनों में हिस्सा लेते हैं।