मंदिर बंद होने से संकट में भिखारी, दाने-दाने को तरसे; बोले- अब तो भगवान के भरोसे ही कटेगा वक्त, जाने पूरी कहानी


  • गंगानगर कोरोना के कारण जिले में कर्फ्यू लागू है। इसका असर हर किसी पर अलग-अलग है। छोटे दुकानदार व्यवसाय प्रभावित होने से दुखी हैं। बच्चों को पढ़ाई की चिंता है, वहीं एक वर्ग ऐसा है जिसके पास इस वक्त रोटी के जुगाड़ का कोई जरिया ही नहीं है। ये हैं वे भिखारी हैं, जो मंदिरों के सामने दानदाताओं की दी वस्तुओं से ही जीवनयापन करते हैं। शनिवार और रविवार के दो दिन के कर्फ्यू में इनकी पीड़ा खुलकर सामने आई।

  • शहर के गोशाला रोड पर शनि मंदिर के सामने बैठने वाले भिक्षुक कृष्णदास बताते हैं कि वे हर शनिवार मंदिर के सामने बैठते हैं और बाकी दिन अलग-अलग इलाकों में मांगकर जीवन यापन करते हैं। शनिवार को ही लॉकडाउन होने के बाद उनका दिन अच्छा नहीं निकला। उनका कहना था कि शनिवार के दिन तो मंदिर के आगे इतना कुछ मिल जाता है कि रविवार को छुट्टी होने और कम लोगों से दान मिलने के बावजूद दिन आसानी से बीत जाता है।

सब कुछ राम भरोसे

  • वहीं, उनके पास ही बैठकर भिक्षा मांगने वाले हेमदास का कहना था कि लॉकडाउन बढ़ा तो यह चिंता बढ़ाने वाला होगा। मंदिर खुले ही नहीं हैं। ऐसे में जीवन यापन करना ही परेशानी बन गया है। अब भगवान से एक ही दुआ है कि शहर के हालात जल्दी सुधरे और कर्फ्यू आगे नहीं बढ़े।

मंदिरों के आयोजनों पर असर

  • कोरोना के चलते इन दिनों शहर में नवरात्र के बावजूद मंदिरों में बड़े आयोजन नहीं हो रहे हैं। विनोबा बस्ती के दुर्गा मंदिर के पदाधिकारी संदीप कटारिया पहले ही सरकारी गाइड लाइन के चलते बड़े आयोजन नहीं करवाने की बात कर चुके हैं।