बाड़मेर जिले जिले की गिड़ा तहसील के गांव ‘खारड़ा भरतसिंह’ निवासी श्री ‘जुंझार सिंह बारहठ’ को दिल की गहराइयों से सलाम। आभार।
महज 17 वर्षीय इस किशोर ने हमारे सामने जीवरक्षा व बहादुरी की एक नजीर कायम की है। श्री जुंझार सिंह ने अपनी जान की परवाह किये बगैर जिस तरह से जीवरक्षा के खातिर हथियारबंद शिकारियों को ललकारा, उनके गुनाह को दुनिया के सामने रखा, उनसे मुकाबला किया वो बहादुरी की एक असाधारण मिसाल है। जुंझार सिंह की हिम्मत, वन्यजीवों के प्रति उनकी प्रेम भावना के चलते ही शिकारी कानून के शिकंजे में आ सके।
मैं एक बार फिर श्री जुंझार सिंह और इनके परिवार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता हूं जिन्होंने बेजुबानों की रक्षा के खातिर इतना समर्पण भाव दिखाया।
साथ ही जुंझार सिंह जैसे तमाम दूसरे वन्यजीव प्रेमियों का भी आभार प्रकट करता हूं जो वन्यजीवों की रक्षा के खातिर सदैव प्रयासरत रहते हैं। साथियों, आप सब जानते हैं कि राजस्थान एक विशाल प्रदेश है। यहां वनभूमि में आवास-प्रवास करने वाला वन्यजीव पूरी तरह सुरक्षित है लेकिन वनभूमि से बाहर राजस्व भूमि मसलन खेतों, ओरण, गौचर, रोही आदि में विचरण करने वाले वन्यजीवों पर हमेशा खतरे मंडराते रहते हैं। शिकारियों, कुत्तों और दूसरे हिंसक जानवरों का खतरा। सबसे बड़ा खतरा इंसानी लालच से। रोही, ओरण, गौचर जैसी भूमि के लगातार सिकुड़ने से इन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास उजड़ रहे हैं। भूमि के कृषि उपयोग और एक हद तक लोगों की असंवेदनशीलता ने भी वन्यजीवों के सामने संकट खड़ा कर दिया है।
मेरा मानना है कि हम सबकी संवेदनशीलता, सहयोग, तत्परता ही वन्यजीवों की सुरक्षा में सबसे ज्यादा मायने रखती है क्योंकि सरकारी महकमे हमारे सबके सहयोग के बगैर आगे नहीं बढ़ सकते। उनके पास उपलब्ध सीमित संसाधनों से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
एक बार फिर हम श्री जुंझार सिंह जैसे जीवप्रेमियों से प्रेरणा लें और वन्यजीवों को बचाने का प्रण लें, उनके आवास मसलन जंगल, रोही, गौचर, ओरण आदि को बचाने का प्रण लें।
