जेल से फरार हुए थे 5 बंदी, पकड़े गए 11


 

क्रिमिनल से दोस्ती तो कभी भी परेशानी का सबब बन सकती है। नोखा जेल से फरार हुए पांच दोस्तों ने इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया है। यहां जेल से 21 अप्रैल को पांच बंदी फरार हुए थे, लेकिन दो महीने बाद जब सभी को फिर से गिरफ्तार किया गया तो छह और दोस्त सलाखों के पीछे पहुंच गए। इन छह युवकों ने फरार बंदियों को जेल से आजाद कराने के लिए यारी निभाई थी और

 और आज खुद सलाखों के पीछे हैं।

नोखा कारागार से 21 अप्रैल की आधी रात रतिराम, मनदीप सिंह, अनिल पंडित, सुरेश कुमार, सलीम खान फरार हो गए थे। जेल से बाहर निकलने के साथ इन सब ने अपने दोस्तों को फोन किया। उनसे सहायता ली। किसी ने छिपने के लिए तो किसी ने वाहन आदि की व्यवस्था के लिए गुहार लगाई थी। मित्रों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। किसी ने अपने खेत में बंदी के रुकने की व्यवस्था कर दी तो किसी ने घर के अहाते में। पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़ती गई और इन बंदियों को पकड़ लिया। सबसे पहले हनुमानगढ़ पुलिस ने पंजाब के एक गांव से बंदी को पकड़ा। वो वहां अपने दोस्त के घर में छिपा हुआ था। हनुमानगढ़ के संगरिया से सटते पंजाब के फरीदकोट जिले के डबलीखन्ना गांव से सुरेश और सलीम को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अनिल पंडित और मनदीप को भी गिरफ्तार कर लिया गया। ये दोनों भी अपने दोस्तों की मदद से इधर-उधर फरारी काट रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य दोषी रतिराम पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा था। सोमवार को उसे भी पकड़ लिया गया।

इनको भारी पड़ी यारी

इन क्रिमिनल दोस्तों की मदद करने के मामले में पुलिस अब तक ओमप्रकाश जाट, सुरेश कुमार जाट, राहुल बिश्नोई, गुरदीप सिंह, भगवान सिंह व रामकरण को गिरफ्तार कर चुकी है। ये सभी फरारी के वक्त न सिर्फ इन बंदियों के संपर्क में थे, बल्कि उन्हें सहयोग भी कर रहे थे। इन सभी पर अपराधिकयों को जेल से भगाने का मामला दर्ज होगा। अब इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 212 के तहत कार्रवाई होगी। फरार बंदी के अपराध पर आधारित सजा ही अब फरारी में सहयेाग देने वाले बंदी को भुगतनी पड़ सकती है।

कैसे आये पकड़ में?

दरअसल, पुलिस ने इस पूरे मामले में आईटी सेल की सहायता ली। न सिर्फ बंदियों के बल्कि उनके रिश्तेदारों तक के फोन की निगरानी की गई। उनकी लोकेशन बार बार चैक की गई। बंदियों के दोस्तों का भी पता लगाया गया। एक साथ रहने की लोकेशन भी मिलती रही है। ऐसे में पुलिस को पता चल गया कि कौन कहां हैं? सुरेश और सलीम को तो पुलिस के कांस्टेबल के सूत्रों ने जानकारी दी थी कि पंजाब में छिपे हुए हैं।

गंभीर आरोप है मास्टर माइंड पर

इस फरारी के मास्टर माइंड रतिराम पर एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन केस चल रहे हैं। फिलहाल वो एनडीपीएस एकट के तहत अंदर था लेकिन अब जेल से भागने का मामला मामला भी दर्ज होगा। इतना ही नहीं इन दोस्तों की जमानत भी अब आसान नहीं है। किसी बाहरी दोस्त से जेल में मिलना भी इनके लिए मुश्किल हो गया है।