
सरपंचों ने किया 1 दिन का कार्य बहिष्कार, पूनियां व मीणा ने सीएम काे पत्र लिखा
प्रदेश के 11 हजार से अधिक सरपंच ग्राम पंचायताें के पीडी खाते खाेलने का विराेध कर रहे हैं। वहीं अब तक राज्य सरकार ने 74 प्रतिशत तक ग्राम पंचायताें के पीडी खाते खाेल दिए है। प्रदेश में 11 हजार 316 में से 8339 पीडी खाते खुल चुके है जबकि 2977 पीडी खाते खुलना शेष है।
अलवर में सर्वाधिक 574 में से 484 ग्राम पंचायताें में पीडी खाते खुल चुके है। वहीं दूसरे नंबर पर नागाैर में 500 में से 450 खुल चुके है। इसी तरह जयपुर 603 में से 303 खुले है जबकि जाेधपुर में 627 में से 297 पीडी खाते खुले है। सात जिलाें में खुले 100 प्रतिशत पीडी खाते: प्रदेश के सात जिलाें में 100 प्रतिशत ग्राम पंचायताें के पीडी खाते खुल चुके है। इनमें सवाई माधाेपुर 227 , हनुमानगढ़, 269, बूंदी 184, बारां 232 सिराेही 170 और टाेंक 236 और पाली 341 ग्राम पंचायताें में पीडी खाते खुल चुके है।
11000 पंचायताें पर रहे ताले
पीडी खाते खाेलने के विराेध में गुरुवार काे प्रदेशभर के सरपंचाें ने ग्राम पंचायत कार्यालय खुलने नहीं दिए और कार्यालयों पर ताले लगाए रखे। कई जगहों पर धरने व प्रदर्शन भी हुए । सरपंच संघ ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 11 हजार ग्राम पंचायत कार्यालय बंद रहे है। अब 30 जनवरी काे बैठक कर आंदाेलन की रणनीति तय की जाएगी।
सरकार रियायत देने की तैयारी में लेकिन सरपंच संघ नहीं माना
सरकार ने पीडी खाताें काे ऑपरेट करने के लिए रियायत देने की तैयारी भी की है। उदाहरण के ताैर पर बगैर बिल वाऊचर सबमिट किए रकम उठाना। सामान्य तरह से ट्रांजेक्शन के पाॅवर देना आदि बिंदु शामिल है। उधर सरपंच संघाें ने कहा कि वित्त विभाग के अधिकारी फिलहाल ये बात कर रहे है। चूंकि पीडी खाता सरकार के अधीन रहेगा। ऐसे में खतरा है कि राज्य सरकार किसी भी समय अपने हिसाब से काम करेगी।
पूनियां व मीणा ने सीएम काे पत्र लिखकर जताया विराेध
सरपंचाें के वित्तीय अधिकार कटाैती और ग्राम पंचायताें के पीडी खाते खाेलने काे लेकर सरपंचाें ने प्रदेशभर में सांसद-विधायक और पाॅलिटिकल पार्टियाें के प्रदेशाध्यक्षाें काे ज्ञापन दिया है। इसी कड़ी में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां और राज्यसभा सांसद डाॅ. किराेड़ीलाल मीणा ने सीएम अशाेक गहलाेत काे पत्र लिखकर पीडी खाते खाेलने पर विराेध दर्ज कराया है। इन नेताओं का कहना है कि पुरानी व्यवस्था ही लागू रहे। ऐसी मंशा सरपंचों ने जताई है।


