कोरोनाकाल में कार्यकर्ता जुटे हैं समर्पणभाव से सहयोग की आहुति देने में विफा के अभिभूत करने वाले है सेवा के प्रकल्प !!
जयपुर – विप्र फाउंडेशन ब्राह्मण समाज का एक ऐसा वैश्विक संगठन है जिसकी नींव “उन्नत समाज, समर्थ राष्ट्र” की एक बड़ी सोच और मजबूत इरादों के साथ रखी गई लगती है। लगता है कि संस्था के गठन के समय कोई ऐसा दुर्लभ संयोग एवं ग्रह- नक्षत्रों का शुभ मिलन रहा होगा कि संस्था उत्तरोत्तर अपने मिशन पर प्रगति पथ की तरह आगे बढ़ती गई। बाधाएं व अवरोध भी उसका रास्ता रोक नहीं पाए। विप्र फाउंडेशन की टीम ने अपने ध्येय पर अटल रहकर जो सामाजिक कार्य समाज व राष्ट्रहित में किए वो अभिभूत व अकल्पनीय हैं।
अमृत मंथन की तरह पूरे राष्ट्र में फैले भुदेवों के बीच जाकर गहन विचार मंथन कर जिस संस्था का जन्म हुआ हो, वह सामाजिक संगठन अपने दृढ़ इरादों से कैसे भटक सकता है। विप्र फाउंडेशन को ग्यारह वर्ष पूर्ण हो चुके। इन वर्षों में अनेकों आयोजनों को टीम भावना से जिस संकल्प के साथ पूरा किया गया ऐसा जज्बा दूसरे संगठनों में कम ही देखने को मिलता है। कोरोना काल को ही ले तो इन डेढ़ वर्षो में सेवाकार्य शुद्ध अंत:करण की भावना से किए गए। ऐसे सेवाकार्यों में परोपकार के दर्शन परिलक्षित होना स्वभाविक है। शास्त्रों में कहा भी गया है कि
आत्मार्थं जीवलोकेऽस्मिन् को न जीवति मानव: ।
परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति ॥
(इस जीवलोक में स्वयं के लिए कौन नहीं जीता? परंतु, जो परोपकार के लिए जीता है, वही सच्चा जीना है।)
इसी प्रकार…
अष्टादश-पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्।
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्।।
(अठारह पुराणों में व्यास जी ने केवल दो बात कही है। दूसरे का उपकार करने से पुण्य मिलता है और दूसरे को पीड़ा देने से पाप।)
विफा कार्यकर्ता जुटे हैं जी-जान से सेवाकार्यों में
परोपकार की भावना से ओत प्रोत विप्र फाउंडेशन का कार्यकर्ता कोरोना काल में भी चैन से नहीं बैठा। गत वर्ष कोरोना पीडि़तों के लिए राहत कार्यों में उल्लेखनीय भूमिका निर्वहन करने के पश्चात इस वर्ष दूसरी लहर में पुन: सीमित संसाधनों के उपरांत जो कार्य विफा ने किये, वे अकल्पनीय हैं। सेवा का जज्बा हो तो स्वत: स्फूर्त काज हो ही जाते हैं।
त्वरित निर्णय की मिसाल देखिए। रात साढ़े बारह बजे फोन पर बात होती है कि जयपुर में बीलवा स्थित कोविड सेंटर को हमे भी बेड देने चाहिए। सुबह 500 बेड का आर्डर तथा दोपहर तीन बजे विप्र फाउंडेशन के संरक्षक सरकारी मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी व जोन अध्यक्ष राजेश कर्नल विफा पदाधिकारियों के साथ चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को संस्था की ओर से दिए जाने वाले 500 बेड के सहयोग का पत्र ही लेकर पहुंच जाते हैं। इस नेक काज में संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री सीए डॉ. सुनील शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
विप्र ऑक्सीजन बैंक
देशभर में विप्र ऑक्सीजन बैंक के माध्यम से 108 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर्स जरूरतमंदों को उपलब्ध करवाने का निर्णय भी कुछ ऐसे ही हुआ और एक पखवाड़े में 108 के स्थान पर 113 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर्स देश के विभिन्न शहरों में विप्र बैंक में जरूरतमंदों को उपलब्ध करवाने के लिए पहुंच भी गए।
स्वविवेक से आहत को राहत
कोविड से घिरे परिवारों को दोनों टाइम भोजन की उपलब्धता कराना, लॉक डाउन के चलते किसी को भूखा ना रहना पड़ेे, ऐसे लोगों हेतु सड़कों पर फूड पैकेट वितरण, सैकड़ों परिवारों को राशन किट डिस्ट्रीब्यूशन किया। इतना ही नहीं फाउंडेशन ने दिव्यांगों का मनोबल बढ़ाने के लिए उनके द्वारा संचालित किचन में आर्थिक सहयोग भी किया। गौमाता हेतु चारा, पशु पक्षियों के आहार की व्यवस्था हो चाहे सरकार के सहयोग से डोर-टू-डोर आयुर्वेदिक काढा वितरण तथा राहगीरों व अन्य प्राणियों के लिए जल मन्दिर की स्थापना, वृद्धाश्रम व आमजन को आवश्यक दवा आदि का प्रबंधन देशभर में कार्यरत विप्र फाउंडेशन की शाखाओं ने स्वविवेक से सफलता के सौंपान तक पहुंचा डाला। अकेले उदयपुर में विप्र फाउंडेशन के युवाओं ने 25 दिनों में बीस हजार पैकेट सुबह-शाम लोगों के घरों तक पहुंचाएं हैं। ऐसे ही बांसवाड़ा की टीफिन सेवा आदिवासी अंचल में मिसाल बन गई हैं।
कन्या विवाह में भी योगदान
आर्थिक तंगी से त्रस्त परिवारों की छह कन्याओं के विवाह में 21000/- की शगुन राशि से किंचित सहयोग करके विप्र फाउंडेशन ने सेवाधर्म का निर्वहन किया है। विप्र फाउंडेशन आज भी इन सेवाकार्यों में राष्ट्र को सर्वोच्च मान सभी वर्गों की सेवा में जुटा हुआ है।
विप्र फाउंडेशन पर साक्षात प्रभु का आशीर्वाद
विप्र फाउंडेशन के मुख्य समन्वयक श्रीकिशन जोशी बताते हैं कि जब कोविड चरम पर था। देश भर में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा था। रुपए होते हुए भी कंसेंट्रेटर्स या सिलेण्डर्स उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। पांच लीटर मेडिकल ग्रेड का कंसेंट्रेटर 85/90 हजार रुपयों में भी मिल नहीं रहा था। सिलेण्डर्स खरीदना भी एक कड़ी मशक्कत का काम था।
ऐसी कठिन परिस्थितियों के बीच घोषित परशुराम पखवाड़े के प्रथम दिन 14 मई को नागपुर और रतलाम शाखाओं ने ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की व्यवस्था कर ऑक्सीजन बैंक की शुरुआत की। फिर प्रतिदिन दो-तीन स्थानों पर विप्र ऑक्सीजन बैंक खुलती गयी।
दिल्ली-अहमदाबाद से लेकर चाइना और कनाडा तक जहां भी उपलब्धता हुई, कार्यकर्ता कंसेंट्रेटर या फिर तीन चार स्थानों पर जम्बो सिलेण्डर्स समर्पण से ऑक्सीजन बैंक स्थापित कर लोगों के प्राणों की रक्षा में जुट गए।
इसे प्रभु का साक्षात आशीर्वाद ही कहेंगे कि एक पखवाड़े में 108 उपकरणों की विप्र ऑक्सीजन बैंक बनाने का आह्वान चमत्कारिक रूप से ठीक पन्द्रहवें दिन 113 कंसेंट्रेटर के साथ पूर्ण हो गया। औरंगाबाद, आहोर, बीकानेर, बेंगलुरू, भिवंडी, भुवनेश्वर, भीलवाड़ा, बालोतरा, दिल्ली, डेगाना, धौलपुर, गुडगांव, हावडा, हैदराबाद, हुगली, इंदौर, इचलकरंजी, जोधपुर, झुंझुनूं, जाजपुर रोड, कोलकाता, काँटाबाजी, खरसिया, मुंबई, नोहर, नागपुर, पुरूलिया, पाली, रतलाम, रायगढ़, रायरंगपुर, राउरकेला, सोहना, सिलीगुढ़ी, उदयपुर व उस्मानाबाद में यह पुनीत कार्य हो चुका है। कुछ और शाखाएं भी शीघ्र आरंभ करेंगी।
नि:स्वार्थभाव से किए कार्यो को स्वयं नारायण पूरा करते हैं
विप्र फाउंडेशन के संस्थापक राष्ट्रीय संयोजक सुशील ओझा ने कहा कि संगठन की विभिन्न शाखाओं द्वारा प्रदत्त सेवाओं को देख गर्व महसूस होता है। इन कार्यों से यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि इस बात का कोई महत्व नहीं कि सेवा के लिए आपके पास कितने भौतिक संसाधन हैं। महत्व इस बात का है कि आपके पास कितना और कैसा मानव संसाधन है।
सुशील ओझा ने कहा,विप्र फाउंडेशन के धरोहर स्वरूप कार्यकर्ताओं ने सिद्ध कर दिखाया कि उनके लिए कोई भी काम असंभव नहीं। नि:स्वार्थ और निश्च्छल मन से किये गये संकल्पों को भगवान नारायण स्वयं पूर्ण करते हैं। संस्था के पास देश के कोने-कोने में जो अनमोल रत्न हैं, वही संस्था का सबसे बड़ा साधन और संसाधन हैं। यह एक ऐसी ताकत है जिसकी बदौलत आप कितना भी बड़ा और कठिन लक्ष्य आसानी से पूरा कर सकते हैं।
सेवा वॉरियर्स के दीर्घायु की कामना
विप्र फाउंडेशन के अध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा सोती ने इस संकट काल में भी जी जान से सेवा में जुटे समस्त सुसंस्कारित, समर्पित, निष्ठावान सदस्यों के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए अपने आर्शीवचनों में ईश्वर से स्वस्थ, ऐश्वर्यवान व यशवान के साथ दीर्घायु होने की कामना की तथा आभार जताया।
सुखद अनुभूति के बीच अपनों को खोने का गम भी
हां! इन उपलब्धियों के बीच संस्था ने कोरोना की त्रासदी में अपनों को खोया भी। ऐसे दु:खद वाकये हुए कि अभी तक ये विश्वास ही नहीं होता कि ये दिवंगत आत्माएं अब हमारे बीच नहीं है। विप्र फाउंडेशन इनकी स्मृति को चिर स्थाई बनाने में जुटी है ताकि उनकी यादे सदैव बनी रहे।
सादर प्रकाशनार्थ – श्रीमान सम्पदाक महोदय !!
भवदीय – दिनेश ओझा,प्रदेश महामंत्री विफा युवा प्रकोष्ठ,राज.!!
