- राजस्थान के कोटा में कोरोना के कहर के बीच प्लाज्मा थेरैपी (Plasma therapy) की अच्छे रिजल्ट देखने को मिले हैं. यही कारण है कि प्लामा डोनेशन को लेकर लोगों के सकारात्मक विचार अन्य लोगों को भी प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. कोटा में अबतक 260 लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं. जबकि 500 से ज्यादा लोगो के प्लाज्मा चढ़ाया जा चुका है.
- मेडिकल कॉलेज कोटा में आचार्य, मेडिसिन विभाग डॉ. मनोज सालूजा ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी के बाद 80 फीसदी मरीज रिकवर हुए हैं. जबकि गम्भीर 20 फीसदी मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का असर नहीं हुआ है. डॉ. सालूजा ने कहा कि प्लाज्मा थेरपी को लेकर अभी और विस्तृत अध्ययन की जरूरत है.
कोटा में 3 कंडीशन में चढ़ाया प्लाज्मा
- 1.आरटीपीसीआर जांच में पॉसिटिव आये मरीज
2.न्यूमोनिया के शिकार
3.मल्टीऑर्गन फैल्योर मरीजवहीं, आरटीपीसीआर जांच में जो मरीज नेगेटिव थे, पर क्लिनिकल व रेडियोलॉजी पिक्चर में उनकी स्थिति पूरी तरह कोविड फेवर में थी. डॉ. मनोज सालूजा ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी को तीन तरीके से परखा गया.
1 मरीज अस्पताल में कितने दिन भर्ती रहा.
2.मरीज को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन व वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी.
3.मोरटेलिटी -
करीब 20 फीसदी ऐसे मरीज थे जो अस्पताल में देर से भर्ती हुए. इस कारण ऐसे मरीजो में प्लाज्मा थेरेपी का असर नहीं हुआ. डॉ. सालूजा ने बताया कि कोटा में प्लाज्मा थेरेपी के नकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिले. उन्होंने बताया कि आईसीएमआर ने लिमिडेट मरीज़ो पर ही प्लाज्मा थेरेपी को स्टडी किया है. प्लाज्मा थेरेपी की स्टडी में अधिक संख्या में सभी तरह के मरीजों को लिया जाना चाहिए.
