अपने आम के बाग में एक ऊंचे से पेड़ के नीचे कई दिनों से बड़े बड़े दाने का कोई बीज देखकर मुझे उनके बारे में ज्ञिज्ञासा हुई। ऐसा प्रायः रोज ही विगत कई दिनों से हो रहा था। जब भी सुबह पहुंचता वहां कुछ बीजों को गिरे देखता। सहज ही जिज्ञासा हुई कि आखिर यह है क्या? और यहां कैसे आया? और एक पेड़ के ही नीचे क्यों। जबकि बाग में कई सारे पेड़ हैं।
दिमाग पर जोर डाला। बचपन में वे बीज देखे थे। कही वे महुये के बीज तो नहीं हैं, जिन्हें कोया भी कहते हैं। कन्फर्म हो गया वे कोया ही हैं। मगर आम के पेड़ के नीचे और वह भी केवल एक आम के पेड़ के नीचे कोया आखिर कैसे मिल रहा है। सेब नीचे ही क्यों गिरा ऊपर क्यों नहीं गया जैसी जिज्ञासा फलीभूत हो चुकी थी। क्या कोई बच्चा या बच्चे तो दूर से बीन कर नहीं ला रहे? मेरे बाग से कोई आधे किमी की दूरी पर महुये के पेड़ हैं।
कोई भी खोज अक्सर किसी जिज्ञासा की परिणति होती है। खूब माथा पच्ची होती रही। कोई क्लू ही न मिले। और कोयों का मिलना बदस्तूर जारी रहा। फिर एक दिन और आगे के भी कई दिन आम के उसी ऊंचे पेड़ पर मैंने धनेश चिड़िया – ग्रे हार्नबिल को बैठे देखा। (दूसरे कमेंट का चित्र)।
अब अचानक मन में कौंधा कि कहीं धनेश और महुये के कोये में कोई संबंध तो नहीं। गूगल ने किसी भी शोध का समय अल्पकालिक कर दिया है। उत्तर वहीं से मिल भी गया। हां, धनेश को बरगद और महुये के फल खूब पसंद हैं। वह उन्हें खाता है और अपनी विष्ठा में उनके बीज गिरा देता है। कठोर कवच के बाद भी इनका अंकुरण आसान हो जाता है क्योंकि पक्षी आमाशय के पाचन रस में छिलका हल्का हो जाता है। मतलब महुआ या बरगद के बीज अंकुरण में धनेश सहायक है। और यह बीज के डिसपर्सल में भी मदद करता है। दूर दूर तक फैला देता है।
ऐसे ही मारिशस में कभी एक वृक्ष होता था कैवेलैरिया। जिसका फल डोडो पक्षी खाता था और उसकी विष्ठा से निकलने के बाद बीज का अंकुरण होता था। जब अंग्रेज मारिशस पहुंचे तो न उड़ पाने वाले डोडो पक्षी का मांसाहार के लिये समूल नाश कर दिया। डोडो धरा से ही लुप्त हो गया। और देखते देखते कैवेलैरिया के वृक्ष भी लुप्त हो गये। पारिस्थितिकी तंत्र आपस में कितना गुथा हुआ है और जीवों का कैसा अन्योन्याश्रित संबंध है, ऐसे उदाहरण हमें प्रमुखता से बताते हैं।
हम बेतहाशा पशु पक्षियों के नैसर्गिक रहवासों और खुद उनका नाश करते जा रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि बरगद महुये के पेड़ आगे चलकर केवल गूगल पर ही दिखें। बहरहाल अपनी खोज पर हम प्रमुदित होकर आपसे भी इसे साझा करने का लोभ रोक नहीं पाये।
ऐसा ही चंदन के साथ भी होता है,पक्षी की बीट में से निकले हुए बीज ही अंकुरित होते है,यही बड़ और पीपल के साथ भी होता है।
चित्र साभार गूगल से
लेखन आभार DrArvind Mishra
