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बीकानेर राजस्थान में भले ही कांग्रेस की सरकार है, लेकिन बीकानेर में फिलहाल पार्टी की स्थिति गंभीर ही है। जिले की तीन नगर पालिकाओं में से अध्यक्ष पद के लिए एक जगह ही मैदान में है। जबकि दो जगह पार्टी का प्रत्याशी ही मैदान में नहीं है। भाजपा तीनों जगह अध्यक्ष पद के लिए लड़ रही है और दो जगह कड़ी टक्कर में है।
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बीकानेर के नोखा में 45 सीटों पर चुनाव हुए, जहां कांग्रेस ने एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया। यहां कांग्रेस ने नोखा विकास मंच को समर्थन दिया। जिसने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़ा था। अब 28 सीट लेकर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने जा रहा है। यहां भाजपा मैदान में है, लेकिन जीत की संभावना बहुत कम है। नोखा में एनसीपी से नारायण झंवर, भाजपा से श्रीनिवास झंवर के साथ ही निर्दलीय सुनील झंवर चुनाव मैदान में है।
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श्रीडूंगरगढ़ में कांग्रेस ने चुनाव तो लड़ा, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए दावेदार खड़ा नहीं किया। यहां भाजपा को बढ़त है और कांग्रेस मैजिक फिगर से काफी पीछे है। ऐसे में भाजपा से बागी प्रीति शर्मा को समर्थन दे दिया है। यहां कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में है लेकिन कांग्रेस नहीं है। भाजपा के तीन वोट अपने पाले में डालने के लिए प्रीति शर्मा के साथ कांग्रेस भी प्रयास कर रही है। भाजपा उम्मीदवार मानमल शर्मा मजबूत स्थिति में है। फिर भी अपने पार्षदों की मजबूत बाड़ेबंदी कर रहे हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि उनके पार्षदों को धमकाया जा रहा है।
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उधर, देशनोक में कांग्रेस अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में नजर आ रही है लेकिन पूर्ण बहुमत यहां भी नहीं है। कांग्रेस और भाजपा दोनों बराबरी पर है, जबकि एनसीपी का एक पार्षद निर्णायक हो सकता है। यहां कांग्रेस का पलड़ा मजबूत है, लेकिन कमजाेर भारतीय जनता पार्टी भी नहीं है। भाजपा नेताओं ने भी बाड़ेबंदी की हुई है। यहां कांग्रेस से ओमप्रकाश मूंधड़ा अध्यक्ष पद के दावेदार है जबकि भाजपा से नथमल की दावेदारी है। एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार अनिल भी मैदान में है।
बीकानेर में कांग्रेस बदहाल:नोखा और श्रीडूंगरगढ़ में मैदान छोड़ चुकी है कांग्रेस, सिर्फ देशनोक में जीत की कोशिश
